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नवदुर्गा;
माता आदिशक्ति के नव दुर्गा प्रकृति के तीन विभाग मे है ।
पार्वती, लक्ष्मी तथा सरस्वती ।
इन तीनों शक्तियों के तीन अलग रूप बनें जो सृजन, पालन और हरण का कार्य संभालते है ।
1. शैलपुञी; माता का ये रूप पर्वत राज हिमावन की पुञी का है जिनका वाहन वृषभ है ।
2. ब्रमचारीनी; माता का यह रूप तपस्या व आचरण करनेवाला है । इस रूप के माध्यम से माता आधिशक्ति ने शिवजी को पा लिया ।
3. चंद्रघंटा; यह रूप अत्यंत शांतिदायक एवं कल्याणकारी है और विविध प्रकार के अस्त्र-शस्त्र इनकी आठ बुझाऔ मे है । इनका तीसरा नेत्र सदैव खुला रहता है और इनका वाहन सिंह है । ये युध्द करने हेतु सदैव तत्पर रहती है ।
4. कुशमानदा; अस्ठभुजा और शस्त्रधारीनी रूप। केवल यही है जो सूर्य के भीतर लोक प्रवास करती है । दसों दिशाए इन्हीं से आलोकित है ।
5. स्कंधमाता; इनकी ऊपासना द्वारा मोक्ष का मार्ग सुलभ होता है ।
6. कत्यायीनी; इनकी उपासना करने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की औलोकीक प्राप्ति होती है । इसी रूप मे माता ने महीषासुर का वध किया ।
7. कालराञी; यह माँ काली का रूप है । ये अंधकार का विनाश करती है। इनकी आराधना करने से असुरी शक्ति भी भयभीत होती है ।
8. व्शेतवर्ण; चतुर्भुज, त्रिशूलधारी रूप। ये अपने उपासको को वरदान देती है । यह इनका महागौरी रूप है ।
9. सिध्ददात्री; अनीमा, गरिमा, महिमा, प्राप्ति, आदि आठ सिध्दिया इनसे ही प्राप्त होती है । महादेव का अर्धनार्वेश्वर रूप माता के इस रूप की ही देन है ।
नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ
जय माता दी
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कृष्णा जग का दुलारा, Sweetu ❤, #ॐ #जीतू.. !! जय श्री #राधे !! लव यू #कृष्णा... 💋 #SwEEtuBEtu (◕)(◕)

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