कृष्ण का मतलब होता है पूरा "संपूर्ण" तो मतलब हुआ की कृष्ण ज्ञान वान और शक्ति शाली ही नहीं बल्कि अत्यंत प्रभावशाली व्कतित्व के धनि है ।। ♥ ThE NamE Krishna LitErally Means “AttractivE” So, Not Only Is Krishna/God PowErful & Knowing, He Is Also ThE Most BEautiful PErson... ♥
शुक्रवार, 29 अप्रैल 2016
गुरुवार, 21 अप्रैल 2016
सुन्दर प्रसंग ध्यान दे ।
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महाभारत का युद्ध चल रहा था -एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर "भीष्म पितामह" घोषणाकर देते हैं कि;
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"मैं कल पांडवों का बध कर दूँगा"
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उनकी घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में बेचैनी बढ़ गई
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भीष्म की क्षमताओं के बारे में सभी को पता था इसलिए सभी किसी अनिष्ट की आशंका से परेशान हो गए|
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तब
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श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा अभी मेरे साथ चलो -
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श्री कृष्ण द्रौपदी को लेकर सीधे भीष्म पितामह के शिविर में पहुँच गए -
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शिविर के बाहर खड़े होकर उन्होंने द्रोपदी से कहा कि - अन्दर जाकर पितामह को प्रणाम करो -
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द्रौपदी ने अन्दर जाकर पितामह भीष्म को प्रणाम किया तो उन्होंने -
"अखंड सौभाग्यवती भव" का आशीर्वाद दे दिया , फिर उन्होंने द्रोपदी से पूछा कि !!
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"बत्सा तुम इतनी रात में अकेली यहाँ कैसे आई हो. क्या तुमको श्री कृष्ण यहाँ लेकर आये है" ?
तब द्रोपदी ने कहा कि;
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"हां और वे कक्ष के बाहर खड़े हैं" तब भीष्म भी कक्ष के बाहर आ गए और दोनों ने एक दुसरे से प्रणाम किया -
भीष्म ने कहा;
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"मेरे एक बचन को मेरे ही दूसरे बचन से काट देने का काम श्री कृष्ण ही कर सकते है"
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शिविर से वापस लौटते समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी से कहा कि;
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"तुम्हारे एक बार जाकर पितामह को प्रणाम करने से तुम्हारे पतियों को जीवनदान मिल गया है"
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"अगर तुम प्रतिदिन भीष्म, ध्रतराष्ट्र, द्रोणाचार्य, आदि को प्रणाम करती होती और दुर्योधन- दुःशासन, आदि की पत्नियां भी पांडवों को प्रणाम करती होंती, तो शायद इस युद्ध की नौबत ही न आती"
तात्पर्य्;
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वर्तमान में हमारे घरों में जो इतनी समस्यायें हैं उनका भी मूल कारण यही है कि;
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"जाने अनजाने अक्सर घर के बड़ों की उपेक्षा हो जाती है "
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"यदि घर के बच्चे और बहुएँ प्रतिदिन घर के सभी बड़ों को प्रणाम कर उनका आशीर्वाद लें तो, शायद किसी भी घर में कभी कोई क्लेश न हो "
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बड़ों के दिए आशीर्वाद कवच की तरह काम करते हैं उनको कोई "अस्त्र-शस्त्र" नहीं भेद सकता -
निवेदन;
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सभी इस संस्कृति को सुनिश्चित कर नियमबद्ध करें तो घर स्वर्ग बन जाये।
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॥ जय श्री राधे ॥
शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016
रामायण के उत्कृष्ट व्याख्या;
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राम हमारी आत्मा है ।
सीता हमारा दिल है ।
रावण हमारे मन में है जो हमारी आत्मा से हमारे दिल को चुरा रहा है ।
लक्ष्मण हमारी चेतना है, जो हमारे साथ हमेशा के लिए है और हमारी और से सक्रिय है ।
हनुमान हमारा अंतर्ज्ञान और साहस है, जो हमारे दिल को पुनः प्राप्त करने के लिए हमारी आत्मा को फिर से चेतन करने में मदद करता है ॥
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राम नवमी की शुभकामना
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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2016
हिन्दू नव वर्ष
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रिद्धि दे, सिद्धि दे,
वंश में वृद्धि दे, ह्रदय में ज्ञान दे,
चित्त में ध्यान दे, अभय वरदान दे,
दुःख को दूर कर, सुख भरपूर कर, आशा को संपूर्ण कर,
सज्जन जो हित दे, कुटुंब में प्रीत दे,
जग में जीत दे, माया दे, साया दे, और निरोगी काया दे,
मान-सम्मान दे, सुख समृद्धि और ज्ञान दे,
शान्ति दे, शक्ति दे, भक्ति भरपूर दें...
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🍁आप सभी को नव वर्ष विक्रम संवत 2073 के लिए हार्दिक शुभकामनाएं
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॥ जय श्री राधे ॥
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