मन हर के ले गयो श्याम मेरा
श्रृंगार बसन्ती कर के
मेरी गली से निकले मनमोहन
श्रृंगार बसन्ती कर के
बिजली सा चमके पीताम्बर
नीला वर्ण दिखे ज्यों अम्बर
मोर मुकुट हिला गयो दिल को
श्रृंगार बसन्ती कर के
श्रृंगार बसन्ती कर के
मेरी गली से निकले मनमोहन
श्रृंगार बसन्ती कर के
बिजली सा चमके पीताम्बर
नीला वर्ण दिखे ज्यों अम्बर
मोर मुकुट हिला गयो दिल को
श्रृंगार बसन्ती कर के
मन हर के ले गयो श्याम मेरा ॥
♡ ❤ ♡
॥ जय श्री राधे ॥
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