परम सनेही हरि कहे राधा कोकर धाम,
तोसो है प्यारो अधिक रटे जो राधा नाम ।
रटे जो राधा नाम मेरो प्राणन से प्यारो ,
सत्य कहु ये नाम मेरों जीवन रखवारो ।।
बड़ भागी वो जीव सफल किनी तिन देही ,
सत्य कहु ये नाम मेरो है परम सनेही ।
मगन प्रेम रा सुनत हि होत रासिले श्याम ,
श्रवण हेत हरि धा शब्द त्याग देत निज धाम ।।
त्याग देत निज धाम नाम राधा मतवाले ,
पाछे पाछे फिरत नन्द के लाल ग्वाले ।
जाम मुख सो हरि सुनत है रा को शब्द रासाय ,
प्रेम भक्ति निज कौशकी देत तही तत्काल ।।
देत तही तत्काल अजो कहे करी खगोरी ,
पूरो मोल न दियो मति कीनी ओ भोरी ।
राधा राधा सुनत हरि पावें आथा सुख ,
धन्य धन्य बलिहार नाम श्रीराधा जा मुख ।।
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॥ जय श्री राधे ॥
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