शनिवार, 28 मई 2016

नित हृदय-गति में निरंतर
धड़कनों से कौन हो तुम ?
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प्राण पर मेरे अंधेरा
छा रहा दुख की घटा का,
आज तो दुर्लभ बना है
देखना तेरी छटा का ।
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श्वास के स्वर में निरंतर
सरगमों से कौन हो तुम ?  #ॐ 
♡ ♥ ♡
॥ जय श्री राधे ॥

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