यूँ तो हवा के रुख को समझती है पतंगें,
फिर भी बुरे हालत से लड़ती है पतंगें,
फिर भी बुरे हालत से लड़ती है पतंगें,
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कटती है, उतरती है और चढ़ती है पतंगें,
उम्मीद के धागे से ही बढ़ती है पतंगें,
उम्मीद के धागे से ही बढ़ती है पतंगें,
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गिरती है, सम्हलती है, मचलती है पतंगें,
बेखौफ तमन्नाओं सी उड़ती है पतंगें ॥ #ॐ
बेखौफ तमन्नाओं सी उड़ती है पतंगें ॥ #ॐ
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मकर सक्रांति की शुभकामनाएँ.. 😝😝
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॥ जय श्री राधे ॥
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