मंगलवार, 23 दिसंबर 2014

तुम बिना हथेली की हर लकीर प्यासी है 
तीर पार कान्हा से दूर राधिका-सी है 
शाम की उदासी में याद संग खेला है 
कुछ ग़लत न कर बैठे मन बहुत अकेला है 
औषधि चली आओ चोट का निमंत्रण है 
बाँसुरी चली आओ होंठ का निमंत्रण है ॥ ♡ 💋💕
.
॥ जय श्री राधे ॥
.
कृष्णा जग का दुलारा#मिष्टी Sweetu #ॐ #जीतू.. !! जय श्री #राधे !!  लव यू #कृष्णा... �� #SwEEtuBEtu (◕)(◕)



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें