मुरली बजा के मोहना क्यों कर लिया किनारा ।
अपनों से हाय कैसा व्यवहार है तुम्हारा ॥
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ढूंढा गली गली में, खोजा डगर डगर में।
मन में यही लगन है, दर्शन मिले दुबारा ॥
मुरली बजा के मोहना...
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मधुबन तुम्ही बताओ, मोहन कहाँ गया है ।
कैसे झुलस गया है, कोमल बदन तुम्हारा ॥
मुरली बजा के मोहना...
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यमुना तुम्हीं बताओ, छलिया कहाँ गया है ।
तूँ भी छलि गयी है, कहती है नील धारा ॥
मुरली बजा के मोहना...
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दुनियां कहे दीवानी, मुझे पागल कहे जमाना।
पर तुमको भूल जाना, हमको नहीं गवांरा ॥
मुरली बजा के मोहना ॥
♡ ♥ ♡
अपनों से हाय कैसा व्यवहार है तुम्हारा ॥
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ढूंढा गली गली में, खोजा डगर डगर में।
मन में यही लगन है, दर्शन मिले दुबारा ॥
मुरली बजा के मोहना...
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मधुबन तुम्ही बताओ, मोहन कहाँ गया है ।
कैसे झुलस गया है, कोमल बदन तुम्हारा ॥
मुरली बजा के मोहना...
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यमुना तुम्हीं बताओ, छलिया कहाँ गया है ।
तूँ भी छलि गयी है, कहती है नील धारा ॥
मुरली बजा के मोहना...
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दुनियां कहे दीवानी, मुझे पागल कहे जमाना।
पर तुमको भूल जाना, हमको नहीं गवांरा ॥
मुरली बजा के मोहना ॥
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