शनिवार, 2 जनवरी 2016

मेरे लरजते हुए होंठों पर, दाँतों की पाँत में,
उसने रोप दी अपनी इच्छाओं की गुनगुनाती पौध,
और मैं, अचानक पहुँच गयी किसी और ही बृहत् मात्र
आलौकिक विश्वालोकन में;
सोचती हूँ,

यही है 'प्रेम' और सार्वभौमिक, भावनात्मकप्रेमकी परिभाषा ॥ 
 जय श्री राधे 
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राधा राधे, #मिष्टी Sweetu # #जीतू.. !! जय श्री #राधे !!   #SwEEtuBEtu ()()


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